History of Modern Hindi

संगीत, चित्र और साहित्य की नई स्थिति

आधुनिक हिंदी का इतिहास

नई परिस्थिति और परिवेश के कारण साहित्य, संगीत और कला को भी संकट का सामना करना पड़ा। उनको आश्रय देने वाले केन्द्र तेजी से टूटने लगे थे। कला-संगीत तो विशेष घरानों से सम्बद्ध हुआ करते थे। ये घराने पीढ़ी-दर-पीढ़ी उनकी रक्षा में संलग्र रहा करते थे। इन घरानों के संरक्षण का दायित्व सामन्त वर्ग पर था।

मध्यकाल में भक्त कवियों के अतिरिक्त अकबर, जहाँगीर, मानसिंह तोमर आदि ने संगीत को प्रश्रय दिया। उनके दरवारों में अनेक कलावन्त रहते थे। तानसेन अकवरी दरबार का ही संगीतज्ञ था। मानसिंह ने गूजरी टोड़ी, मंगल गूजरी, ध्रुपद आदि को नवाविष्कृत किया। मुगल-सल्तनत के समाप्त होने पर संगीत की मीलिकता समाप्त हो गई। वह छोटे-मोटे सामन्तों के आश्रय में किसी प्रकार सांस लेता रहा।

पाश्चात्य संस्कृति की आँधी में जो कुछ शेष था वह भी समाप्त हो गया। पर भारतीय पुनजगिरण के फलस्वरूप रविबाबू ने नए संगीत की कल्पना की जिसमें पूर्व और पश्चिम के स्वरों का मिश्रण था। इसे रावीन्द्रिक संगीत की संज्ञा दी गई। सन्‌ 1916 में अखिल भारतीय संगीत परिषद्‌ की स्थापना हुई। अब भारतीय संगीत के पुनरुद्धार का कार्य आरम्भ हुआ। इस कार्य में सबसे अधिक महत्वपूर्ण योग विष्णु नारायण भातखंडे का है।

आधुनिक काल में कुछ दिनों तक भारतीय चित्रकला पश्चिम का अनुकरण करती रही। पर पश्चिम के ढंग से जिन तैल चित्रों पर निर्माण किया गया वे अपनी अभिव्यक्ति में मध्यकालीन थे। त्रावंकोर के राजा रविवर्मा के चित्रों की विषयवस्तु भी पीराणिक और धार्मिक थी। उनके चितन्नों की रूपरेखा सुनिर्मित, बर्णयोजना चटकपूर्ण और आकर्षक थी। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने सरस्वती में रविवर्मा के अनेक चित्रों को प्रकाशित किया ।

पर १६८४ में कलकत्ता आर्ट स्कूल की स्थापना के साथ ही भारतीय चित्रकला में नया मोड़ आता है। ई० वी० हैवेल इसके अध्यक्ष थे। आगे चलकर हैवेल, अवनीद्धनाथ ठाकुर तथा आनन्द कुमारस्वामी ने भारतीय घित्रशैली को नया रूप दिया जो मूलतः इस देश की होती हुई भी आधुनिक जीवन-दृष्टि से अनुप्राणित थी। सन्‌ १६०७ में गगनेन्द्रनाथ ठाकुर ने इंडियन सोसाइटी आफ ओरिएंटल आर्ट्स की स्थापना की। इन प्रयलों का फल यह हुआ

कि भारतीय चित्र-शैली का एक स्वतन्त्र रूप निर्मित हुआ | चित्र-शैली में भी बंगाल ने पहल की | इसके माध्यम से अपनी चित्र-परम्परा को नए सन्दर्भो में पुनः जीवित करने का प्रयास किया गया। भारतीय नवजागरण की ही अभिव्यक्ति चित्रों के माध्यम से हुई।

नव-जागरण का सबसे अधिक प्रभाव बँगला साहित्य पर पड़ा। आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने ‘हिन्दी साहित्य का इतिहास’ में लिखा है– ” संबत्‌ १६२२ में वे (भारतेन्दु हरिश्चन्द्र) अपने परिवार के साथ जगन्नाथ जी गए। उसी यात्रा में उनका परिचय बंगदेश की नवीन साहित्यिक प्रगति से हुआ। उन्होंने बंगाल में नए ढंग के सामाजिक, देश-देशान्तर सम्बन्धी ऐतिहासिक और पीराणिक नाटक, उपन्यास आदि देखे और हिन्दी में वैसी पुस्तकों के अभाव का अनुभव किया | ‘ सम्भव है थे बंगला साहित्य से अनुप्रेरित हुए हों। किन्तु दूसरे साहित्य के आदर्श पर अपने वास्तविक साहित्य का निर्माण नहीं होता। अपने युग की संवेदनाओं को आत्मसातू करके ही भारतेन्दु ने नए ढंग की साहित्य रचना का समारम्भ किया |

नई आर्थिक व्यवस्था, पाश्चात्य शिक्षा, जीवन-पद्धति के कारण इस देश की अपनी पहचान खो गई थी। पर इस अबरोध ने ही यहाँ के प्रयुद्ध वर्ग को नए सिरे से अपनी पहचान करने के लिए बाध्य किया। यह पहचान नवीन और प्राचीन के अन्तर्विरोध में की गई। इसे दूसरे शददों में पश्चिमीकरण और भारतीयकरण का विरोध भी कहा जा सकता है। इन दोनों की रस्साकशी काफी दिनों तक चलती रही। नव-जागरण के अग्रदूतों ने पश्थिमीकरण के विवेक-सम्मत परिवेश में अपनी संस्कृति को नए ढंग से संगठित करने का प्रयास किया । इसके फलस्वरूप साहित्यकारों ने अतीत को सामने रखकर अपने को पुनः गीरवान्वित अनुभव किया और देश में उभरती हुई राष्ट्रीय चेतना को ठोस रूप दिया। आधुनिक काल का अधिकांश साहित्य अपने को पहचानने तथा पाश्चात्य बन्धनों से छुटकारा पाने का इतिहास है।

अतीत के गौरव को इस देश की सभी भाषाओं में अभिव्यक्त किया गया। इस गौरव के मूल में पुनरुत्थानवाद (रिवाइवलिज्म) न होकर नवीन जागरण ही क्रियाशील थधा। यदि कहीं पर इस पुनरुत्थानवाद की ध्वनि सुनाई भी पड़ी तो कालान्तर में समाप्त हो गई। राष्ट्रीयया इस काल का दूसरा प्रमुख स्वर था। सन्‌ १६४७ तक इसमें कहीं भी शिथिलता नहीं दिखाई पड़ती। स्वतन्त्रता प्राप्त करने के पश्चात्‌ यह स्वर आत्मालोचन में शक बदल गया। किन्तु १६६० के आस-पास आधुनिकता का जो प्रभाव हिन्दी साहित्य पर पड़ा उससे साहित्यिक प्रगति की दिशा बदल गई।

READ ALSO:

About admin

One comment

  1. Essay Crafting Assistance by essays campus! Just the most excellent writers in British isles, United States, just the very best quality! And Good value | 100% non-plagiarized essays, free of cost rates and.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*